रिबोर के नाम पर लाखों का भुगतान, जमीन पर बदहाल हैंडपंप 

महराजगंज़। विकास खंड निचलौल क्षेत्र के की विभिन्न ग्राम सभाओं में हैंडपंपों के बोर एवं रिबोर के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद जमीनी पड़ताल के दौरान विकास खंड परिसर समेत कई स्थानों पर हैंडपंप खराब, टूटे अथवा झाड़ियों में पड़े मिले। कहीं फर्श तक नहीं बना है तो कहीं हैंडपंप लंबे समय से अनुपयोगी दिखाई दिए।रिबोर कार्य की अनुमानित लागत करीब 28  हजार रुपये प्रति हैंडपंप बताई जाती है। ऐसे में रिबोर के दौरान निकाले जाने वाले पुराने लोहे के पाइप, सरिये व अन्य सामग्री का क्या होता है और उसका हिसाब-किताब किस स्तर पर दर्ज किया जाता है? कई स्थानों पर रिबोर के बाद भी हैंडपंप उपयोग के लायक नहीं हैं। वहीं, जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कार्यस्थल का नियमित भौतिक सत्यापन नहीं किया जाता। बिना प्रभावी स्थलीय निरीक्षण के ही कागजी प्रक्रिया पूरी कर भुगतान की कार्रवाई कर दी जाती है। यदि रिबोर कार्य वास्तव में धरातल पर हुआ है तो बड़ी संख्या में हैंडपंप बदहाल क्यों हैं? क्या प्रत्येक भुगतान से पहले मौके का सत्यापन किया गया? रिबोर से निकली सामग्री का रिकॉर्ड कहां है और उसकी नीलामी अथवा निस्तारण किस प्रक्रिया के तहत हुआ? इस संबंध में डीपीआरओ श्रेया मिश्रा से जानकारी लेना चाहे लेकिन उनका मोबाइल बंद मिला।

जिला प्रभारी -विजय कुमार पाण्डेय कि रिपोर्ट

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