*आशा कार्यकर्त्रियो के मेहरबानी से क्षेत्र मे फल फूल रहे अवैध हास्पिटल*

आशा कार्यकर्त्रियो के मेहरबानी से क्षेत्र मे फल फूल रहे अवैध हास्पिटल

गोरखपुर – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद के कैंम्पियरगंज थाना अंतर्गत मछलीगाँव पुलिस चौकी से महज 500 मीटर की दूरी पर संचालित एक अवैध हॉस्पिटल जो मंगलम पॉलीक्लिनिक के नाम से संचालित है जिसमें दिनांक 20 मार्च 2021 को दिन में लगभग 2:00 बजे आशा कार्यकत्री सुशीला देवी का पति त्रिभुवन निवासी मछलीगांव एंबुलेंस से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कैंम्पियरगंज ले गया जहां डाक्टरों ने जच्चा की हालत खराब देखकर मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया । परंतु त्रिभुवन ने कमीशन के चक्कर में जच्चा रीना के मां-बाप को फटकार ते हुए रेफर वाला कागज फेंक दिया और यह कहा कि गोरखपुर ले जाएंगे तो बहुत रुपया लग जाएगा । मैं इसको मछलीगांव में ले चल कर भर्ती करा दूंगा जहां आपका कम पैसे में काम हो जाएगा और बिना परिजनों की सहमति के आनन-फानन में हॉस्पिटल संचालक से बात करके बोलेरो गाड़ी मंगा कर मछलीगांव में खजुरिया रोड पर स्थित मंगलम पाली क्लीनिक पर भर्ती करा दिया जहां रात में लगभग 12:00 बजे के बाद परिजनों ने तथाकथित डॉ अरविंद चौरसिया निवासी राजपुर को बुलाकर दिखाए । जो ड्रिप लगाई गई है हाथ में वहां से खून बह रहा है तो इस पर बिना किसी डिग्री के डॉक्टर ने उस ड्रिप से बोतल में चार पांच तरह की और दवाओं वाले इंजेक्शन डालकर पुनः लगाया । उसी के कुछ देर के बाद जच्चा-बच्चा दोनों मृत हो गए । और स्थिति की नजाकत को भांपते हुए यह डॉक्टर ने मरीज को मरीज के परिजनों को मूर्ख बनाने का प्रयास करते हुए कहा कि हालत खराब है इसलिए इसे गोरखपुर ले जाना होगा। और इतना कह कर उनलोगों को भेज दिया और परिजनों और मरीज को जाने के बाद यह तथाकथित डाक्टर अपना सारा सामान समेटकर फरार हो गया और मछलीगाँव के इस अस्पताल मे भर्ती अन्य मरीजों को लेकर पनियरा के ज्योतिमा हास्पिटल मे ले जाकर सिफ्ट करा कर वहीं पर चैन की बंशी बजा रहा है ।

आपको बता दें स्थानीय लोगों और परिजनों ने बताया कि रीना पत्नी फेरई की मौत यही हॉस्पिटल में ही हो गए थी । जिसकी पुष्टि डॉक्टर ने की और बताया कि यह तो पहले ही मर चुकी है । और कौन बदतमीज डॉक्टर था जो लाश को दवा कराने के लिए गोरखपुर भेज रहा है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें इस मृतका के पास पहले से ही दो बच्चे हैं जो इस तथाकथित डॉक्टर की लापरवाही और एक भ्रष्ट कमीशन खोर के चक्कर में अनाथ हो गए । अब ऐसे में इन दोनों अबोध बच्चों की परवरिश की सारी जिम्मेदारी रीना के पति को ही संभालनी होगी । खुद सोचें कि क्या एक बाप मां का स्थान ले पाएगा कभी ? आखिर इन बच्चों का क्या अपराध है जो बचपन में ही इनके मां से इनका साथ छूट गया। और दुनिया से चली गई। समाचार लिखे जाने तक इस मौत के जिम्मेदार अभी तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं । तथा जो तथाकथित डॉक्टर है वह उसी दिन से पनियरा में स्थित ज्योतिमा हॉस्पिटल पर मौजूद है । और खुलेआम चैन की बंसी बजाते हुए अपने दिन को बिता रहा है । ऐसे में स्पष्ट कहा जा ता है कि अपराधी को छिपा रहे हास्पिटल प्रबंधन ज्योतिमां की भूमिका भी संदिग्ध ही है जो इन्हें संरक्षण दे रहे हैं । आज 5 दिन के बाद भी कैंम्पियरगंज पुलिस की गिरफ्त से यह दोनों मुजरिम फरार हैं । और उनपर कोई कार्यवाही नहीं की गई है ।
आपको बता दें कि इस तरह के पुलिसिया कार्यवाही में न्याय की अपेक्षा कैसे की जाए एक यक्ष प्रश्न है ।
क्या दो बच्चों के परवरिश की जिम्मेदारी अकेले बाप कर पायेगा ?

संवाददाता राजेश यादव

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