साहित्य सृजन धरा तक के बैनर तले मासिक काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन

निचलौल(महराजगंज )स्थानीय नगर निचलौल में “साहित्य सृजन धरा तक” के बैनर तले एक मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन बड़े उत्साह और साहित्यिक गरिमा के साथ किया गया। गोष्ठी में क्षेत्र के कई सम्मानित कवियों और साहित्यप्रेमियों ने भाग लेकर अपनी रचनाओं से समां बांध दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ, जिसे कवि सर्वदानंद “चोटिल” ने प्रस्तुत किया। इसके बाद हास्य कवि आशुतोष “आनेंदु” ने अपनी हास्य कविता “जानू जानू कहने लगा हूं मैं तो शादी के बाद” सुनाकर सबको ठहाकों से लोटपोट कर दिया। उन्होंने आगे की पंक्तियाँ “वो सुनाती है बातें तो मिक्सी चला लेता हूं… वो बदला चुकाने को मुझे वाशिंग मशीन बना दिया” से सभी को खूब हंसाया।
कवि धीरज “धवल” ने हास्य और व्यंग्य के रंग में अपनी रचना “मुझे बीबी के बेलन से कभी आराम नहीं मिलता” तथा “सब की सब सरकारें अंधी, गूंगी, बहरी हैं” जैसी पंक्तियाँ सुनाकर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। उन्होंने समसामयिक सामाजिक घटनाओं पर आधारित रचना “आप कितने बदतमीज़ हैं, ये आपका लहज़ा बता रहा है” भी प्रस्तुत की। सर्वदानंद “चोटिल” ने अपनी लोकप्रिय रचना “मुझको शोहरत मिल गई मेरी बदनामी से” और भोजपुरी कविता “नैहर में कबसे बीमार रहलू” सुनाकर कार्यक्रम को और रोचक बना दिया। कवि नयन ने भावनाओं से ओत-प्रोत अपनी श्रृंगार कविता “नयन ही देखते, नयन हैं जानते” से सबका ध्यान आकर्षित किया।
कार्यक्रम में अध्यापक सतीश मिश्रा ने पीड़ा और दिखावा पर आधारित कुछ सारगर्भित पंक्तियाँ तथा एक सामाजिक गीत प्रस्तुत कर समा बांध दिया। गोष्ठी में संदीप, सर्विंद, साहबलाल, दिनेश, प्रमोद, अनिल, रामप्रवेश, अजीत, उमेश मिश्र, नागेश्वर पटेल, दीपचंद, संजय कटियार, राघवेंद्र आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

जिला प्रभारी विजय पाण्डेय की रिपोर्ट

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