सिसवा में बढ़ी सियासी सरगर्मी, सोशल मीडिया पर सक्रिय हुए रामनिवास यादव के समर्थक* 

विधानसभा चुनाव से पहले सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्टर, सपा के पुराने नेता को लेकर तेज हुई राजनीतिक चर्चा*

30 वर्षों से समाजवादी विचारधारा से जुड़े रामनिवास यादव बोले टिकट पर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व का होगा

सिंदुरिया(महराजगंज)सिसवा विधानसभा क्षेत्र में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज होने लगी है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं मिठौरा ब्लाक के पूर्व ब्लाक प्रमुख रामनिवास यादव को संभावित दावेदार के रूप में प्रस्तुत करते हुए उनके समर्थक सोशल मीडिया पर लगातार पोस्टर और बैनर साझा कर रहे हैं। इन पोस्टरों के वायरल होने के बाद क्षेत्र में उनकी राजनीतिक सक्रियता और संभावित दावेदारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।हालांकि रामनिवास यादव ने अभी तक अपनी दावेदारी को लेकर कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की है। इस संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव लड़ने का निर्णय पूरी तरह समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व का विषय है। पार्टी जो भी निर्णय करेगी, वह उन्हें पूरी तरह स्वीकार होगा। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाना है।रामनिवास यादव जिले में समाजवादी राजनीति का एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। उनका राजनीतिक सफर छात्र जीवन से ही शुरू हो गया था। शुरुआती दौर में वह पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की विचारधारा से प्रभावित रहे और उस समय की दलित मजदूर किसान पार्टी (दमकीपा) के समर्थन में युवाओं के साथ सक्रिय भूमिका निभाई। उस दौर का चर्चित नारा— “चौधरी चरण सिंह मत घबराना, तेरे पीछे नया जमाना”— क्षेत्र में उनके राजनीतिक अभियान का हिस्सा रहा।बाद में वह जनता दल से जुड़े और समाजवादी विचारधारा के साथ सक्रिय रहे। जब वर्ष 1992 में मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी की स्थापना की, तभी से रामनिवास यादव पार्टी के साथ जुड़ गए। तब से लेकर आज तक वह लगातार समाजवादी पार्टी के संगठन और उसकी राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।स्थानीय राजनीति में उनका प्रभाव वर्ष 1995 में पहली बार ग्राम पंचायत चुनाव जीतने के साथ मजबूत हुआ और जिले में सबसे कम 21साल के उम्र में प्रधान बने। वह रामपुर मीर ग्राम पंचायत से लगातार वर्ष 2010 तक ग्राम प्रधान निर्वाचित होते रहे। वर्ष 2010 में पंचायत सीट अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित होने के कारण उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। इस दौरान उन्होंने सहकारिता क्षेत्र की राजनीति में कदम रखा और सहकारी समिति के चुनाव में सक्रिय रहे। उनके परिवार ने चार बार निर्विरोध सहकारी समिति के अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की।वर्ष 2015 में ग्राम पंचायत की सीट सामान्य होने पर उन्होंने फिर चुनाव लड़ा और इस बार इनकी पत्नी कुसुम यादव को चुनाव लड़ाया जिसका परिणाम यह रहा कि वह 80 प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त कर बड़ी जीत हासिल की। उसी दौरान उन्होंने स्वयं लेदवा ग्राम पंचायत से क्षेत्र पंचायत का चुनाव लड़ा और निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद वह मिठौरा ब्लाक के प्रमुख निर्विरोध निर्वाचित हुए। ब्लाक प्रमुख के कार्यकाल में भी उन्होंने समाजवादी पार्टी के संगठनात्मक विस्तार और जनसंपर्क को मजबूती देने का प्रयास किया और जनहित के बहुत से कार्य किये। 1995 से मिठौरा ब्लाक व निचलौल ब्लाक व सिसवा सहित पूरे जनपद में अपने सिद्धांतों के लिए जाना माना पंचायत प्रतिनिधियों में जाना माना लोकप्रिय चेहरा हैं। अब विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में चल रहे अभियान ने सिसवा विधानसभा की राजनीतिक फिजा को गर्मा दिया है। हालांकि टिकट को लेकर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व के हाथ में होने की बात कहकर रामनिवास यादव फिलहाल संगठन की लाइन पर ही चलते नजर आ रहे हैं, लेकिन क्षेत्र में उनकी सक्रियता और समर्थकों के डिजिटल अभियान ने उन्हें संभावित दावेदारों की चर्चा में जरूर ला खड़ा किया है।

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