निचलौल(महराजगंज़)केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का उद्देश्य ग्रामीण मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना और गांवों में विकास कार्यों को गति देना है। हालांकि, निचलौल विकास खण्ड के ग्राम सभा ईटहिंया में इस योजना के संचालन को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है।ग्रामीणों का कहना है कि गांव में दो परियोजनाओं पर मिट्टी कार्य स्वीकृत है। पहली परियोजना उमराव के खेत से बढ़ैपुरवां सिवान तक चकबन्ध पर मिट्टी कार्य तथा दूसरी परियोजना शिवनाथ के खेत से भीम के खेत तक चकबन्ध पर मिट्टी कार्य से संबंधित है। आरोप है कि इन दोनों परियोजनाओं के लिए कुल 12 सेट में मस्टररोल जारी किए गए हैं।शिकायतकर्ताओं के अनुसार पहली परियोजना में प्रतिदिन 44 तथा दूसरी परियोजना में 61 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है। इस प्रकार रोजाना कुल 105 श्रमिकों की हाजिरी मस्टररोल में अंकित की जा रही है, जबकि ग्रामीणों का दावा है कि मौके पर अपेक्षित कार्य दिखाई नहीं दे रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि अभिलेखों में दर्ज उपस्थिति और जमीनी हकीकत में अंतर है, तो इससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका उत्पन्न होती है। उनका कहना है कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना का लाभ वास्तविक श्रमिकों तक पहुंचना चाहिए और प्रत्येक कार्य में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार जहां विकास कार्यों में शून्य सहिष्णुता (जीरो टॉलरेंस) की नीति पर जोर दे रही है, वहीं ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि आम जनता का विश्वास कायम रह सके।
जिला प्रभारी-विजय कुमार पाण्डेय की रिपोर्ट
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