निचलौल(महराजगंज़)जन्म-मृत्यु पंजीकरण को लेकर उत्तर प्रदेश में नई व्यवस्था लागू की गई है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय, उत्तर प्रदेश की ओर से जारी आदेश में जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम-1969 की धारा 13(3) में संशोधन के बाद विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया स्पष्ट की गई है। यह संशोधित व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी। यदि जन्म या मृत्यु की सूचना एक वर्ष के बाद, लेकिन घटना की तारीख से दो वर्ष के भीतर रजिस्ट्रार को दी जाती है, तो पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM) द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक
होगा। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी के आदेश के आधार पर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण किया जा सकेगा। यदि जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के दो वर्ष बाद दी जाती है तो पंजीकरण के लिए प्रक्रिया और कड़ी होगी। ऐसे मामलों में पंजीकरण प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के आधार पर ही किया जा सकेगा।आदेश में बताया गया है कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देशों तथा जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम में किए गए संशोधन के अनुपालन में यह व्यवस्था लागू की जा रही है। महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, उत्तर प्रदेश की ओर से सभी जिला एवं अपर जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) तथा ग्रामीण क्षेत्र के जिला पंचायत राज अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।सहायक विकास अधिकारी का कहना है कि जन्म-मृत्यु के लिए कार्यालय में लाइने लगी है लेकिन सम्बंधित दस्तावेज न होने से ग्रामीणों को परेशान होना पड़ रहा है।
जिला प्रभारी -विजय कुमार पाण्डेय कि रिपोर्ट
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