*गेहूं की कटाई के लिए मजदूरों की भरमार, रुपये नहीं अनाज की है मांग*

*रिपोर्टर रतन गुप्ता*


*लॉकडाउन की वजह से शहरों से वापस गांव लौटे मजदूर अब खेतों में गेहूं की कटाई कर रहे हैं। ये मजदूर किसानों से मजदूरी के रूप में पैसे नहीं बल्कि अनाज की मांग कर रहे हैं। वहीं पहले 2000 रुपये/क्विंटल बिकने वाले गेहूं की कीमत अब 1600-1700 रुपये हो गई है।——————————*

*सुनकर आश्चर्य होता है, लेकिन सत्य है। लॉकडाउन के चलते शहरों से लौटे* *मजदूर गांवों में अब गेहूं की कटाई के लिए मौजूद हैं। छोटे और मध्यम दर्जे के किसान गेहूं कटाई के लिए इन मजदूरों को काम पर लगा रहे हैं।* हालांकि चौंकाने वाली बात यह है कि मजदूर इसके बदले में रुपये नहीं बल्कि अनाज चाहते हैं। फतेहपुर की महिला मजदूर मैना के अनुसार, अनाज मिलेगा तो पूरे साल परिवार का पेट भर सकेंगे। वैसे भी काम मिलने का अब कोई भरोसा नहीं है।
*गांवों से शहरों की ओर बढ़े पलायन से कृषि कार्य के लिए खेतिहर मजदूरों की कमी हो गई थी। इसके विकल्प में मशीनें आईं। हालांकि हर साल किसानों को* फसल कटाई के लिए मजदूरों की कमी का सामना करना पड़ा। लेकिन इस बार हालात पलट गए। मार्च में लॉकडाउन और उसके बाद बड़े पैमाने *पर देश के हर हिस्से से मजदूरों का पलायन हुआ। गांव पहुंचे मजदूरों से परिदृश्य पूरी तरह बदल गया। गांव-गांव खेतिहर मजदूरों की पर्याप्त उपलब्धता है।*

*गिर गईं गेहूं की कीमतें*
*उन्नाव के जिरिकपुर गांव के अंकित के अनुसार, लॉकडाउन के चलते मजदूर गांवों में ही फंसे हैं। इस कारण छोटे और मध्यम दर्जे के किसान गेहूं कटाई के लिए मजदूरों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके एवज में गेहूं दिया जा रहा है। अंकित का कहना है कि नकदी की कमी के कारण गेहूं की कीमतें गिर गई हैं। पहले 2000 रुपये/क्विंटल बिकने वाले गेहूं की कीमत अब 1600-1700 रुपये हो गई है। उन्नाव के ही मवइयामाफी, बेथर और पचोड्डा के किसानों के अनुसार, एक बीघे में गेहूं कटाई के एवज में 110 किलो गेहूं दिया जा रहा है। इसकी मड़ाई के लिए मजदूरों को अलग से 10 प्रतिशत गेहूं देना पड़ता है। कानपुर देहात में भी यही हाल है। जिन किसानों को मवेशियों के लिए भूसे की जरूरत है, वे ही मशीनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।*

*तीन दिन में एक बीघा कटाई*
*फतेहपुर में हालात कुछ अलग हैं। देश के सबसे पिछड़े जिलों में शुमार इस दोआब क्षेत्र में एक बीघे गेहूं की कटाई के लिए मजदूर को 60-70 किलो गेहूं मिलता है। एक मजदूर तीन दिन में यह काम पूरा कर लेता है। गाजीपुर ग्राम पंचायत की मजदूर मैना के अनुसार, खेत में काम** कर 5 लोगों के परिवार के लिए पूरे साल का अनाज इकट्ठा हो जाएगा। इस साल 10-12 क्विंटल गेहूं मिलने की उम्मीद है। एक किसान इंद्रपाल ने कहा कि कोरोना** से बचाव के लिए गांवों में भी लोग शारीरिक दूरी के नियमों का पालन कर रहे हैं। दो मजदूरों के बीच कम से कम दो गज का फासला रखते हैं।****

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