राजा मोरध्वज की कथा सुन भाव-विभोर हुए श्रोता

फोटो परिचय: कटहरा में प्रवचन करते पं. सतीश पांडेय एवं कथा सुनते श्रद्धालु

झनझनपुर (महराजगंज)प्राचीन शिव मंदिर कटहरा में आयोजित श्री श्री रुद्र महामृत्युंजय महायज्ञ के छठवें दिन शनिवार को कथावाचक पं. सतीश पांडेय ने राजा मोरध्वज की कथा का वर्णन किया। कथा में सतीश पांडेय ने बताया कि एक बार भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से राजा मोरध्वज की सत्य व दानवीरता की प्रशंसा करते हैं। इस पर अर्जुन असहमति जताते हैं। तब राजा की परीक्षा लेने का निर्णय होता है। भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठिर व अर्जुन के साथ राजा मोरध्वज की नगरी को प्रस्थान करते हैं। दरबार में पहुंचने से पहले अर्जुन और श्रीकृष्ण ब्राह्मण का वेश रखते हैं, जबकि युधिष्ठिर शेर बन जाते हैं। दरबार में पहुंचकर भगवान कृष्ण राजा मोरध्वज से कहते हैं कि हमारा शेर भूखा है। इसे मांस चाहिए। इस पर राजा मांस की व्यवस्था कराने का आदेश देते हैं, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण यह कहते हुए मना कर देते हैं कि यह शेर आपके इकलौते पुत्र का ही मांस खाएगा। दानवीर राजा इसे स्वीकार कर लेते हैं और दस वर्षीय पुत्र ताम्रध्वज को रानी पद्मावती के साथ मिलकर आरे से चीर देते हैं। भगवान कृष्ण प्रसन्न होकर अपने असली रूप में प्रकट हो जाते हैं और शेर व साथ में बने ब्राह्मण का परिचय युधिष्ठिर व अर्जुन के रूप में कराते हैं और राजा के पुत्र ताम्रध्वज को वह जीवित कर देते हैं। इसे सुनकर श्रोता भाव-विभोर हो गए। इस मौके पर मिथिलेश सिंह, नरेंद्र शुक्ल, समाजसेवी रवींद्र जैन, सोमनाथ सिंह, रामबचन साहनी, छोटई राय, प्रमोद चौहान, दिग्विजय सिंह, बृजेश सिंह, नरेंद्र गौंड, पप्पू सिंह, कमालुद्दीन, अरविंद कुमार मौजूद रहे।

झनझनपुर संवाददाता-रंजीत शर्मा की रिपोर्ट

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