*चक्कर लगाते पीड़ित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हुए पस्त, लाखो लेकर बाबू हुए मस्त*

निचलौल। आँगनवाड़ी भारत में ग्रामीण माँ और बच्चों के देखभाल केंद्र है। बच्चों के भूख और कुपोषण से निपटने के लिए एकीकृत बाल विकास सेवा कार्यक्रम के भाग के रूप में, 1975 में उन्हें भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया था। आँगनवाड़ी का अर्थ है “आँगन आश्रय”।इस प्रकार का आँगनवाड़ी केंद्र भारतीय गाँवों में बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करता है। यह भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली का एक हिस्सा है। मूल स्वास्थ्य देखभाल गतिविधियों में गर्भनिरोधक परामर्श और आपूर्ति, पोषण शिक्षा और अनुपूरक, साथ ही पूर्व-विद्यालय की गतिविधियों शामिल हैं।तो भी मिठौरा ब्लाक के सेखुई मे भुगतान के बाद भी परिपूर्ण नहीं दिखा। बीते तीन वर्ष पहले लगभग चार लाख पेमेंट होने के बाद भी नहीं परिपूर्ण आंगनवाड़ी केंद्र जबकि वही बगल मे ही सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया। शौचालय तो बना लेकिन जाने का रास्ता नहीं। कौसे जायेगे ग्रामीण शौचालय और आंगनवाड़ी केंद्र मे।वर्तमान ग्राम प्रधान पति रामबदन पटेल का कहना है की पूर्व प्रधान के कार्यकाल मे निर्माण कराया जा रहा था जो परिपूर्ण नहीं हुआ इसका निर्माण ठेकेदार द्वारा कराया गया था जो अधूरा ही है। इस सम्बन्ध मे प्रशासनिक बैठक किया गया लेकिन कोई उद्देश्य नहीं मिला। अब आँगनवाड़ी वर्कर और कार्यकर्ताओं के साथ सबसे बड़ी समस्या उनके मानदेय को लेकर है। जो वर्कर सरकार के नजरिये से मात्र कुछ घंटे ही कार्य करती है। हकीकत में वो 10 घंटे से भी ज्यादा कार्य करती है।
जब केंद्र ही नहीं तो कहा बैठे कार्यकर्ता।

निचलौल तहसील प्रभारी – विजय पाण्डेय की रिपोर्ट

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