महराजगंज़।निचलौल ब्लॉक मुख्यालय पर शुक्रवार को उस समय सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए, जब सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) की कुर्सी दोपहर एक बजे तक खाली पड़ी रही। परिवार रजिस्टर की नकल, मृत्यु प्रमाण पत्र और जन्म प्रमाण पत्र सहित विभिन्न जरूरी कार्यों के लिए दूर-दराज के गांवों से पहुंचे ग्रामीण अधिकारी का इंतजार करते रहे, लेकिन काफी देर तक अधिकारी के नहीं मिलने से कई फरियादी निराश होकर वापस लौट गए। ग्रामीणों का कहना है कि प्रमाण पत्र अथवा परिवार रजिस्टर की नकल जैसी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए उन्हें गांव से ब्लॉक मुख्यालय तक की दौड़ लगानी पड़ती है। कई लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं और बारिश, आंधी-तूफान तथा खराब मौसम के बावजूद किराया खर्च कर ब्लॉक पहुंचते हैं। इसके बाद यदि संबंधित अधिकारी या कर्मचारी कार्यालय में उपलब्ध नहीं मिलते हैं तो उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।पीड़ित ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सहायक विकास अधिकारी से मिलना आसान नहीं है। उनका कहना है कि कई बार अधिकारी के नहीं मिलने के कारण जरूरी दस्तावेजों के लिए उन्हें बार-बार ब्लॉक का चक्कर लगाना पड़ता है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब अधिकारी ही कार्यालय में उपलब्ध नहीं होंगे तो दूर-दराज से आने वाले फरियादियों की समस्याओं का समाधान कैसे होगा।वहीं शासन की व्यवस्था के अनुसार ग्राम पंचायत सचिवों को रोस्टर के अनुसार ग्राम पंचायत सचिवालय में बैठकर ग्रामीणों की समस्याओं का निस्तारण करना है। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि कई सचिव नियमित रूप से ग्राम पंचायत सचिवालय में उपलब्ध नहीं रहते, जिससे जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल और अन्य जरूरी दस्तावेजों के लिए ग्रामीणों को ब्लॉक मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों में लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर पंचायत सचिवालयों का निर्माण कराया गया है, ताकि ग्रामीणों को अपने गांव में ही सरकारी योजनाओं और जरूरी अभिलेखों से संबंधित सुविधाएं मिल सकें। ऐसे में यदि सचिवालय में जिम्मेदार कर्मचारी ही निर्धारित रोस्टर के अनुसार उपलब्ध नहीं होंगे तो इन सचिवालयों के निर्माण का उद्देश्य भी सवालों के घेरे में आ जाता है।
जिला प्रभारी -विजय कुमार पाण्डेय कि रिपोर्ट
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