पत्रकार के मामले में सीओ ने अपना आपा खोया

क्रासर – पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच सौपा सीओ सदर को , सीओ सदर व थानाध्यक्ष की भूमिका संदिग्ध

महराजगंज । जनपद के सिंदुरिया क्षेत्र के एक पत्रकार को एक हिस्ट्रीशीटर व उसके परिजनों द्वारा दौड़ा-दौड़ा कर 27 जून की रात करीब 8. 12 पर जानलेवा हमला किया गया। इससे पत्रकार व उसके भाई को गंभीर चोटे आयी। इस मामले में सिंदुरिया थानाध्यक्ष द्वारा की गई कार्यवाही संदेह के घेरे में है। इस मामले को लेकर जब पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस अधीक्षक से गुरुवार को मिला तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच सीओ सदर अजय सिंह चौहान को सौंपा। सीओ सदर ने पहले तो पत्रकारों को 1 घंटे तक अपने ऑफिस में इंतजार कराया। उसके बाद दूसरे पक्ष की महिला को बुलाकर सर्किल के कई थानाध्यक्षों के सामने पत्रकार को न केवल अपमानित किया अपितु उन्हें व उनके परिजनों को विभिन्न धाराओं में जेल भेजने की धमकी दे डाली। इससे पत्रकारों में रोष व्याप्त है।मामले की जानकारी जब संगठन के एक पदाधिकारी ने पुलिस अधीक्षक को दी तो पुलिस अधीक्षक ने मामले की गंभीरता को लेते हुए तत्काल प्रभाव से उक्त जांच को सीओ सदर से हटाते हुए अपर पुलिस अधीक्षक को सौंप दी। साथ ही पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पत्रकार के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मिली जानकारी के अनुसार जनपद के सिंदुरिया थाना क्षेत्र के सिंदुरिया निवासी एक सम्मानित समाचार पत्र के संवाददाता व उनके परिजनों को 27 जून की रात करीब 8.12 पर ठूठीबारी थाने का हिस्ट्रीशीटर व कोतवाली सदर थाने का गैंगस्टर का आरोपी मनोज दुबे उर्फ सुरेंद्र दुबे व उसके पुत्र आयुष , पत्नी उषा देवी , पुत्री मानसी सहित दो अन्य पुत्रियां व 1 उसके मकान में रहने वाला एक किराएदार आकाश ने धारदार हथियार से जानलेवा हमला कर लहूलुहान कर दिया। इस मामले में पीड़ित पत्रकार की तहरीर पर थानाध्यक्ष सिंदुरिया द्वारा मामले का अल्पीकरण करते हुए मारपीट का ही मुकदमा दर्ज किया जबकि पत्रकार पर हुए जानलेवा की धारा को दूसरे पक्ष से 5 हजार रूपये लेकर हटा दिया। साथ ही दूसरे पक्ष का भी एन सीआर दर्ज कर लिया। इस मामले की जानकारी जब पीड़ित पत्रकार को हुई तो वह अपने संगठन के सदस्यों के साथ एक प्रतिनिधिमंडल के रूप में पुलिस अधीक्षक से मिले। पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीरता से सुना और पीड़ित पत्रकार के मामले की जांच सीओ सदर अजय सिंह चौहान को सौंप दी। मामले की जांच करने के लिए सीओ सदर ने पहले तो पत्रकारों को अपने आफिस में एक घंटे तक इंतजार करवाया।उसके बाद दूसरे पक्ष की महिला को बुलाकर पत्रकार को ही अपमानित करते हुए झूठा साबित करने व जेल भेजने तक की धमकी दे डाली। यही नहीं सीओ सदर ने पत्रकार की एक न सुनी बल्कि हिस्ट्रीशीटर की पत्नी की बातों को प्राथमिकता देते हुए अपने कुर्सी से खड़े होकर उसका वीडियो देखने लगे और हिस्ट्रीशीटर व उसके परिवार को बचाने का आश्वासन तक दे डाला। साथ ही कहा कि अगर पत्रकार के द्वारा दोबारा किसी अधिकारी को प्रार्थना पत्र दिया गया तो पत्रकार के साथ- साथ उसके पूरे परिवार को जेल में डालवा दूंगा एक तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जहां पुलिसिया कार्यप्रणाली में सुधार लाने की भरपूर कोशिश कोशिश कर रहे हैं वहीं सीओ सदर अपने कर्तव्यों से विमुख होकर कलम कारों से उलझ कर उन्हें ही आरोपी साबित करने में तुले हुए हैं। इस मामले को लेकर पत्रकारों में आक्रोश व्याप्त है। और जल्द से जल्द पत्रकारों का संगठन इसके विरोध में पुलिस अधीक्षक से मिलकर सीओ सदर व थानाध्यक्ष को सिंदुरिया को हटाने की मांग करेगा।

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